एक सुंदर और हरे-भरे जंगल में चिन्नू नाम का एक नन्हा खरगोश रहता था। चिन्नू बहुत फुर्तीला था, लेकिन उसमें एक कमी थी; जब भी कोई काम आसानी से नहीं होता था, वह तुरंत हार मान लेता था।
एक सुबह, चिन्नू ने अपने दोस्त पप्पू भेड़ के बच्चे से मिलने का फैसला किया। पप्पू के घर जाने के लिए उसे घने जंगल और पहाड़ियों को पार करना था। चिन्नू बड़े उत्साह के साथ निकल पड़ा। रास्ते में उसने पक्षियों का गाना सुना, लेकिन जल्द ही उसे बहुत तेज़ भूख लगने लगी। जल्दबाजी में वह अपना नाश्ता करना भूल गया था।
भूख से बेहाल होकर इधर-उधर देखते हुए, चिन्नू की नज़र एक ऊँची जगह पर उगे हुए बड़े और रसीले गाजरों पर पड़ी। वे गाजर बहुत लाल और ताज़े लग रहे थे। "वाह!" चिन्नू की आँखें चमक उठीं। "अगर ये गाजर मिल जाएँ, तो मेरी भूख मिट जाएगी!"
चिन्नू ने गाजरों तक पहुँचने के लिए छलांग लगाना शुरू किया। 'हूप!' उसने ऊँची छलांग लगाई, लेकिन गाजरों तक नहीं पहुँच सका। उसने फिर से पूरी ताकत लगाकर छलांग लगाई, पर धड़ाम से ज़मीन पर गिर पड़ा। उसने बार-बार कोशिश की, लेकिन गाजर बहुत ऊँचे थे।
चिन्नू को बहुत गुस्सा और निराशा हुई। उसने नाक सिकोड़ते हुए ज़ोर से कहा, "हूँ! ये गाजर देखने में तो अच्छे हैं, पर पक्का ये बहुत कड़वे और बेस्वाद होंगे। मुझे इनकी ज़रूरत नहीं है!"
पास के पेड़ पर बैठी एक बूढ़ी उल्लू यह सब देख रही थी। उसने धीरे से कहा, "चिन्नू, अगर तुम कोशिश करना छोड़ देते हो, तो हार मान लेना आसान है। लेकिन अगर तुम हार मानने के बजाय कोई दूसरा तरीका सोचते, जैसे किसी लकड़ी का इस्तेमाल करना, तो तुम्हें वे मीठे गाजर ज़रूर मिल जाते!"
चिन्नू को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने समझ लिया कि चीज़ों को बुरा कहने के बजाय, उन्हें पाने का रास्ता ढूँढना चाहिए। उस दिन के बाद, चिन्नू ने तय किया कि वह कभी भी बिना पूरी कोशिश किए हार नहीं मानेगा।
Moral
असफलता मिलने पर चीज़ों में दोष न निकालें, बल्कि नए तरीके से प्रयास करें।