एक शांत गाँव में मुल्ला नाम का एक व्यक्ति रहता था। उसके पास एक गधा था जिसे वह अपने परिवार के सदस्य की तरह प्यार करता था। मुल्ला की एक अच्छी आदत थी—जब तक उसका गधा चारा नहीं खा लेता, वह खुद खाना नहीं खाता था। गाँव वाले उनकी इस अनोखी दोस्ती को देखकर दंग रह जाते थे।
एक सुबह, जब मुल्ला अपने घर के बाहर बैठा था, उसे कुछ अजीब लगा। आमतौर पर उसे गधे के चरने की आवाज़ सुनाई देती थी, लेकिन आज सन्नाटा था। वह घबराकर घर के पीछे गया और देखा कि गधे को बाँधने वाली रस्सी टूट गई थी। गधा वहाँ नहीं था!
"मेरा प्यारा दोस्त कहाँ चला गया!" मुल्ला दुखी होकर चिल्लाया। यह सुनकर गाँव के लोग इकट्ठा हुए और उन्होंने पूरे दिन जंगलों और खेतों में गधे को ढूँढा। लेकिन शाम तक गधा कहीं नहीं मिला। सभी लोग निराश होकर अपने घरों को लौट गए।
शाम को, मुल्ला गाँव की चाय की दुकान पर बैठा था। लेकिन उसके चेहरे पर उदासी नहीं, बल्कि एक मुस्कान थी। यह देखकर एक पड़ोसी ने पूछा, "मुल्ला, तुम्हारा गधा खो गया है और तुम इतने खुश कैसे हो सकते हो?"
मुल्ला हँसते हुए बोला, "मेरे दोस्त, सोचो! अगर मैं उस समय गधे की पीठ पर बैठा होता, तो मैं भी गधे के साथ ही गायब हो जाता! क्योंकि मैं घर के बाहर बैठा था, इसलिए मैं सुरक्षित हूँ!"
मुल्ला की यह बात सुनकर गाँव वालों को एक बड़ी सीख मिली। उन्होंने समझा कि मुसीबत आने पर घबराने के बजाय, अगर हम ठंडे दिमाग से सोचें, तो डर कम हो जाता है। उस दिन के बाद से, गाँव के लोग किसी भी समस्या का सामना मुल्ला की तरह मुस्कुराहट के साथ करने लगे।
Moral
मुसीबत के समय घबराने के बजाय, शांत रहकर सकारात्मक सोच के साथ काम लेना चाहिए।