एक सुंदर शहर में सोमू और रामू नाम के दो जौहरी रहते थे। सोमू व्यापार में बहुत तेज़ था, लेकिन उसमें बहुत लालच था। वहीं रामू बहुत ही ईमानदार और सरल स्वभाव का व्यक्ति था।
एक दिन सोमू पुराने इलाके में गहने बेचने गया। वहाँ उसने एक छोटी बच्ची को रोते हुए देखा। बच्ची अपने जन्मदिन के लिए एक छोटी सी चूड़ी चाहती थी। उसकी दादी ने उदास होकर कहा, "बिटिया, हमारे पास अब सोना या चाँदी खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं।"
बच्ची को रोता देख दादी का दिल पसीज गया। वे घर के अंदर गईं और एक पुराना, धूल भरा दीपक लेकर आईं। उन्होंने सोमू से कहा, "कृपया यह दीपक ले लीजिए और इसके बदले में मेरी पोती को बस एक छोटी सी चूड़ी दे दीजिए।"
सोमू ने उस दीपक को देखा। पहले तो वह साधारण लगा, लेकिन जब उसने उसे साफ किया, तो उसे उसकी नक्काशी और वजन से पता चला कि वह शुद्ध सोने का बना है। सोमू के मन में लालच आ गया। उसने सोचा, "अगर मैं इसे अभी ले लूँ और बाद में आकर कहूँ कि इसकी जाँच करनी है, तो मैं इनसे और भी गहने ले सकता हूँ!"
उसने वह दीपक ले लिया और बच्ची को एक सस्ती सी चूड़ी देकर वहाँ से चला गया। कुछ ही देर बाद, रामू उसी घर पर पहुँचा। दादी ने उसे वही दीपक दिखाया। रामू ने तुरंत पहचान लिया कि वह एक बहुत ही कीमती और प्राचीन सोने का दीपक है।
रामू ने तुरंत कहा, "दादी, यह दीपक बहुत कीमती है। इसे एक छोटी सी चूड़ी के लिए मत दीजिए। मैं इसे आपके पास सुरक्षित रखूँगा और इसकी सही कीमत जानने में आपकी मदद करूँगा।"
जब सोमू वापस आया और दादी से और गहने माँगने की कोशिश की, तो उसे पता चला कि रामू ने सब कुछ बता दिया है। सोमू के लालच और धोखे को देखकर दादी बहुत दुखी हुईं। सोमू को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह शर्मिंदा हो गया। उसने सीखा कि लालच इंसान को चालाक तो बना सकता है, लेकिन अंत में वह उसे अपमानित ही करता है।