बहुत समय पहले, माधव नाम का एक विद्वान व्यक्ति रहता था। एक बार राजा ने उसे दरबार में आमंत्रित किया। राजा ने माधव को यात्रा के खर्च और ज़रूरत का सामान खरीदने के लिए बहुत सारे सोने के सिक्के दिए।
माधव की पत्नी, लक्ष्मी ने कहा, "जब आप वापस आएं, तो घर के लिए कुछ अनाज और मेरे लिए एक नई साड़ी ज़रूर ले आना।" माधव ने वादा किया कि वह सब कुछ लेकर आएगा।
कुछ हफ्तों बाद, माधव वापस लौटा। उसके पास दो भारी पोटलियाँ थीं। लक्ष्मी दौड़कर आई और पूछा, "हमारे खाने-पीने का सामान कहाँ है?"
माधव ने मुस्कुराते हुए पोटलियाँ खोलीं। उनमें अनाज नहीं, बल्कि ज्ञान से भरी अनमोल किताबें थीं! प्राचीन कहानियाँ और महान विचार उन किताबों में थे। माधव ने कहा, "लक्ष्मी, अनाज खाकर खत्म हो जाएगा और कपड़े पुराने हो जाएंगे। लेकिन इन किताबों का ज्ञान कभी खत्म नहीं होगा। यह ज्ञान हमारे बच्चों के काम आएगा और यही हमारा असली धन है।"
किताबें खरीदने के बाद, जो थोड़े बहुत पैसे बचे थे, उनसे माधव ने लक्ष्मी के लिए एक सुंदर साड़ी खरीदी। उसने पूछा, "क्या मैंने कुछ गलत किया है?"
लक्ष्मी की आँखों में खुशी के आँसू आ गए। उसे अपने पति पर गर्व हुआ। उसने कहा, "नहीं माधव, आपने जो किया वह सबसे उत्तम है। यह ज्ञान ही हमारा असली खजाना है।"
Moral
धन और वस्तुएं खत्म हो सकती हैं, लेकिन ज्ञान ही स्थायी संपत्ति है।