नीले आसमान में सूरज और हवा पक्के दोस्त थे। लेकिन हवा को अपनी ताकत पर बहुत घमंड था। वह हमेशा अपनी प्रशंसा खुद ही करता रहता था।
एक दिन हवा ने सूरज से कहा, "देखो दोस्त, मैं कितना शक्तिशाली हूँ! मैं बड़े-बड़े पेड़ों को उखाड़ सकता हूँ। मैं तुमसे कहीं ज़्यादा ताकतवर हूँ!"
सूरज मुस्कुराया और बोला, "ताकत सिर्फ दूसरों को डराने में नहीं है। चलो, हम एक यात्री की मदद करके देखते हैं कि असली शक्ति क्या है।"
तभी, एक यात्री सड़क पर चल रहा था। उसने एक भारी चादर और एक टोपी पहनी हुई थी। हवा ने सोचा, "मैं इसे दिखाऊँगा कि मैं क्या कर सकता हूँ!" और उसने बहुत तेज़ झोंका चलाया। तेज़ हवा के कारण यात्री घबरा गया और पास के एक पेड़ के नीचे बैठ गया। उसकी टोपी भी उड़कर दूर चली गई।
हवा गर्व से बोली, "देखा सूरज, मेरी ताकत!"
सूरज ने शांति से कहा, "अब मेरी बारी है।" सूरज ने अपनी कोमल किरणें उस यात्री पर डालीं। सूरज की हल्की गर्माहट से यात्री को ठंड से राहत मिली और वह फिर से उठकर चलने लगा।
कुछ समय बाद, जब धूप थोड़ी और खिली, तो यात्री ने अपनी भारी चादर उतार दी और बहुत आराम से चलने लगा। वह खुश और तरोताजा दिख रहा था। यह देखकर हवा को अपनी गलती का एहसास हुआ। हवा के तेज़ झोंके ने यात्री को परेशान किया था, लेकिन सूरज की गर्माहट ने उसकी मदद की थी।
हवा ने धीरे से कहा, "मुझे माफ कर दो दोस्त। असली ताकत दूसरों को परेशान करने में नहीं, बल्कि ज़रूरत पड़ने पर उनकी मदद करने में है।"
उस दिन के बाद से, हवा ने घमंड करना छोड़ दिया और एक ठंडी, सुखद बयार बनकर सबको खुश करने लगी।
Moral
सच्ची शक्ति दूसरों को परेशान करने में नहीं, बल्कि उनकी मदद करने में है।