एक घने जंगल में मयू नाम की एक छोटी मोरनी रहती थी। मयू दिखने में बहुत सुंदर थी, लेकिन उसकी आवाज़ अन्य पक्षियों की तरह सुरीली नहीं थी। जब भी मयू बोलती, दूसरे छोटे पक्षी उसका मज़ाक उड़ाते और कहते, "कितना शोर मचाती है यह मयू!" इससे मयू बहुत दुखी हो जाती और अकेले में रोती रहती थी।
एक दिन, मयू जंगल के एक बुद्धिमान बूढ़े कबूतर के पास गई और अपना दुख सुनाया। "सब मेरा मज़ाक उड़ाते हैं क्योंकि मेरी आवाज़ अच्छी नहीं है," मयू ने सिसकते हुए कहा।
कबूतर ने उसे सांत्वना दी और एक कोयल के पास ले गया। कबूतर ने पूछा, "मयू, क्या तुमने कोयल का गाना सुना है?" मयू ने कहा, "हाँ, उसकी आवाज़ बहुत मीठी होती है।"
तब कबूतर ने कोयल से पूछा, "कोयल रानी, तुम्हारी आवाज़ बहुत सुंदर है, क्या तुम खुश हो?" कोयल ने लंबी सांस ली और कहा, "सुरीली आवाज़ का क्या फायदा? मैं मोरनी की तरह सुंदर नाच नहीं सकती और न ही बड़े पंखों के साथ ऊँचा उड़ सकती हूँ। मैं बहुत छोटी और साधारण हूँ।"
यह सुनकर मयू दंग रह गई। कबूतर ने मयू को समझाया, "देखा मयू! जिस चीज़ की तुम्हें कमी महसूस होती है, वही चीज़ कोयल का सपना है। तुम अभी छोटी हो, लेकिन जब तुम बड़ी हो जाओगी, तो तुम्हारे सुंदर पंखों को देखकर पूरा जंगल दंग रह जाएगा। दूसरों की बातों से मत डरो।"
कबूतर की बातों ने मयू के मन में नई उम्मीद जगा दी। उसने दूसरों की बातों पर ध्यान देना छोड़ दिया और गर्व के साथ जीना शुरू कर दिया।
Moral
अपनी कमियों पर ध्यान देने के बजाय, अपनी अनूठी खूबियों को पहचानें और उन पर गर्व करें।