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Moral Story

राजा का सुनहरा लालच

The King's Golden Mistake

बहुत समय पहले, विक्रम नाम का एक शक्तिशाली राजा था। उसका राज्य बहुत समृद्ध था, लेकिन विक्रम के मन में एक गहरी इच्छा थी—वह दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनना चाहता था और सारा सोना उसके पास होना चाहिए था।

4–10 yr 2 min medium
लालच का फल हमेशा बुरा होता है; सच्चा सुख प्रेम और संतोष में है।
राजा का सुनहरा लालच — NilaTales cover art
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बहुत समय पहले, विक्रम नाम का एक शक्तिशाली राजा था। उसका राज्य बहुत समृद्ध था, लेकिन विक्रम के मन में एक गहरी इच्छा थी—वह दुनिया का सबसे अमीर आदमी बनना चाहता था और सारा सोना उसके पास होना चाहिए था।

एक दिन, जब राजा अपने बगीचे में टहल रहा था, उसे एक दिव्य रोशनी दिखाई दी। उस रोशनी के बीच से एक वन देवी प्रकट हुईं। राजा ने श्रद्धा से उन्हें प्रणाम किया। देवी ने मुस्कुराते हुए कहा, "हे राजन, मैं तुम्हारी प्रसन्नता से खुश हूँ। माँगो, तुम्हें क्या वरदान चाहिए?"

लालच में आकर विक्रम ने बिना सोचे-समझे कहा, "मुझे ऐसा वरदान चाहिए कि मैं जिस भी चीज़ को छूऊं, वह तुरंत सोने की बन जाए!"

देवी ने कहा, "तथास्तु" और वे अंतर्ध्यान हो गईं।

विक्रम बहुत खुश हुआ। उसने पास के एक पौधे को छुआ, और वह तुरंत चमकते सोने में बदल गया! वह खुशी से झूम उठा और महल की ओर भागा। उसने मेज, कुर्सी और सजावट की हर चीज़ को छुआ, और सब कुछ सोना बन गया।

लेकिन जल्द ही उसे भूख लगी। उसने खाने के लिए एक रसीला फल उठाया, लेकिन जैसे ही उसने उसे छुआ, फल एक कठोर सोने के गोले में बदल गया। उसने पानी पीने की कोशिश की, पर पानी भी सोना बन गया। वह भूखा और प्यासा रह गया।

तभी उसका छोटा बेटा, राजकुमार आदित्य, दौड़ता हुआ आया। अपने पिता को परेशान देखकर उसने उन्हें गले लगाने की कोशिश की। अनजाने में राजा का हाथ आदित्य को छू गया, और देखते ही देखते राजकुमार एक सोने की मूर्ति में बदल गया!

विक्रम फूट-फूट कर रोने लगा। उसे समझ आ गया कि उसका वरदान वास्तव में एक अभिशाप था। सोना न तो पेट भर सकता था और न ही प्यार दे सकता था।

वह भागकर वन देवी के पास गया और गिड़गिड़ाते हुए बोला, "हे देवी! मुझे सारा सोना नहीं चाहिए, बस मेरे बेटे को वापस लौटा दीजिए!"

राजा का पश्चाताप देखकर देवी ने दया की और उसके बेटे को फिर से जीवित कर दिया। विक्रम ने समझ लिया कि असली धन सोना नहीं, बल्कि परिवार का प्यार है।

Moral

लालच का फल हमेशा बुरा होता है; सच्चा सुख प्रेम और संतोष में है।

The Lesson

लालच का फल हमेशा बुरा होता है; सच्चा सुख प्रेम और संतोष में है।

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