एक घने जंगल के बीचों-बीच एक बहुत ही सुंदर और साफ तालाब था। उस तालाब में दो बहुत ही सुंदर मछलियाँ रहती थीं—एक नीले रंग की और दूसरी सुनहरी। वे दिखने में जितनी सुंदर थीं, उनके मन में उतना ही अहंकार था।
"देखो हमें! सूरज की रोशनी में हमारे पंख कैसे चमक रहे हैं!" नीली मछली अक्सर गर्व से कहती थी। जब भी जंगल का कोई जानवर तालाब के पास आता, वे दोनों पानी से ऊपर उछलकर अपनी कलाबाजी दिखाने लगती थीं। वे अपनी सुंदरता का प्रदर्शन करने में इतनी मग्न थीं कि उन्हें यह अहसास ही नहीं था कि उनका यह दिखावा शिकारियों को उनकी ओर आकर्षित कर रहा है।
उसी तालाब में 'पिंकू' नाम का एक बुद्धिमान मेंढक भी रहता था। पिंकू बहुत ही समझदार था और हमेशा सोच-समझकर कदम उठाता था। उसने एक दिन मछलियों से कहा, "मेरे प्यारे दोस्तों, तुम जो बार-बार पानी से ऊपर उछलते हो, वह खतरनाक हो सकता है। इस छोटे से तालाब में इतनी चर्चा में रहना ठीक नहीं है। कृपया शांत रहो और घास के पीछे छिपे रहो।"
लेकिन मछलियों ने पिंकू की बात अनसुनी कर दी। "तुम एक साधारण मेंढक हो, तुम्हें क्या पता!" कहकर वे फिर से उछलने-कूदने लगीं।
एक शाम, दो मछुआरे उस तालाब के पास आए। उनके पास पहले से ही मछलियों से भरी टोकरियाँ थीं। तभी उनकी नज़र उन दो मछलियों पर पड़ी जो पानी में उछल रही थीं।
"अरे वाह! उन मछलियों को देखो, वे कितनी चमक रही हैं!" एक मछुआरे ने कहा।
दूसरे ने जवाब दिया, "आज हमारी टोकरियाँ भर चुकी हैं। हम कल सुबह जल्दी आएँगे और इन सुंदर मछलियों को पकड़ लेंगे।"
मछुआरे चले गए, तो पिंकू बहुत चिंतित होकर मछलियों के पास आया। "देखा आपने? आपके दिखावे की वजह से अब हम मुसीबत में हैं। हमें तुरंत यह तालाब छोड़कर कहीं और जाना चाहिए।"
मछलियों ने लापरवाही से कहा, "हमें बचना आता है, तुम डरो मत!"
पिंकू ने जब देखा कि मछलियाँ नहीं मानेंगी, तो वह अपने परिवार को लेकर पास की एक बड़ी और सुरक्षित झील में चला गया। लेकिन वे दोनों घमंडी मछलियाँ वहीं रुकी रहीं।
अगली सुबह, मछुआरे ठीक वैसे ही आए जैसा उन्होंने कहा था। उन्होंने तालाब में बड़ा जाल फेंका। मछलियों ने बचने की बहुत कोशिश की, लेकिन जाल बहुत मजबूत था। जैसे ही उन्हें जाल में पकड़ा गया, उन्हें अपनी गलती का अहसास हुआ और वे पिंकू की बात याद करके पछताने लगीं।