एक घने और सुंदर जंगल में गजापति नाम का एक विशाल हाथी रहता था। गजापति बहुत ही नेक दिल था, लेकिन उसके बड़े आकार को देखकर बाकी जानवर उससे डरकर भाग जाते थे। इस वजह से गजापति हमेशा अकेला महसूस करता था। वह अक्सर सोचता था, 'काश! मेरा कोई दोस्त होता जिससे मैं बातें कर पाता।'
एक दिन, गजापति ने एक नया दोस्त ढूँढने का फैसला किया। चलते-चलते उसे पेड़ की टहनी पर बैठा एक बंदर मिला। गजापति ने प्यार से पूछा, 'बंदर भाई, क्या हम दोस्त बन सकते हैं?' बंदर ने हँसते हुए कहा, 'तुम बहुत बड़े हो और मैं बहुत छोटा! हम साथ में खेल कैसे सकते हैं? जाओ, अपने जैसे किसी बड़े जानवर को ढूँढो!' और बंदर वहाँ से कूदकर चला गया।
गजापति थोड़ा उदास हुआ और आगे बढ़ा। उसे एक छोटा चूहा मिला। गजापति ने पूछा, 'नन्हे चूहे, क्या तुम मेरे दोस्त बनोगे?' चूहा डरते हुए बोला, 'अगर तुम्हारा एक पैर भी मुझ पर पड़ गया, तो मैं दब जाऊँगा! तुम मेरे दोस्त नहीं बन सकते।' चूहा तुरंत अपने बिल में छिप गया। गजापति ने एक मेंढक और एक लोमड़ी से भी दोस्ती की कोशिश की, पर सबने एक ही बात कही, 'अपने आकार के दोस्त ढूँढो!'
कुछ दिनों बाद, जंगल में अचानक खलबली मच गई। एक खूंखार बाघ जंगल में घुस आया था और छोटे जानवरों को डरा-धमका रहा था। सभी जानवर अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भाग रहे थे। गजापति ने जब यह देखा, तो उसे बहुत गुस्सा आया। उसने सोचा, 'इन मासूम जानवरों को यह बाघ क्यों परेशान कर रहा है?'
गजापति निडर होकर बाघ के सामने जा खड़ा हुआ। बाघ ने गजापति को देखकर जोर से दहाड़ मारी। लेकिन गजापति बिल्कुल नहीं डरा। उसने अपनी ताकतवर सूंड उठाई और अपने भारी पैरों से ज़मीन को ज़ोर से पटका। ज़मीन हिलने लगी और गजापति के विशाल रूप को देखकर बाघ बुरी तरह डर गया। वह दुम दबाकर जंगल से भाग गया। यह देखकर सभी जानवर हैरान रह गए। बंदर, चूहा और लोमड़ी सब दौड़कर गजापति के पास आए और बोले, 'गजापति, तुमने हमें बचा लिया! हमने तुम्हारी ताकत और तुम्हारे बड़े दिल को नहीं पहचाना। क्या तुम हमारे दोस्त बनोगे?' उस दिन के बाद से गजापति कभी अकेला नहीं रहा।
Moral
किसी को उसके रूप से नहीं आँकना चाहिए; असली दोस्ती दिल से होती है।