एक छोटे से गाँव में सोमू नाम का एक युवक रहता था। वह एक बड़े खेत में सहायक के रूप में काम करता था। उसे महीने के केवल सौ रुपये मिलते थे। सोमू बहुत ही ईमानदार और मेहनती था, लेकिन उसकी कमाई बहुत कम थी।
एक शाम, उसका पक्का दोस्त रवि उसके पास आया। रवि का परिवार बहुत मुसीबत में था। "सोमू, कृपया मेरी मदद करो," रवि ने गिड़गिड़ाते हुए कहा। "मेरी बहन बीमार है और मुझे दवा खरीदने के लिए पैसों की ज़रूरत है। क्या तुम मुझे पचास रुपये उधार दे सकते हो? अगले महीने तनख्वाह मिलते ही मैं इसे लौटा दूँगा।"
सोमू ने दुखी होकर कहा, "रवि, मैं तुम्हारी मदद करना चाहता हूँ, लेकिन मेरी तनख्वाह ही सौ रुपये है। खाने और रहने का खर्च निकालने के बाद मेरे पास कुछ नहीं बचता। मैं तुम्हें पचास रुपये कहाँ से दूँ?"
रवि भारी मन से जाने लगा, तभी सोमू की पत्नी नीला वहाँ आई। "चिंता मत करो रवि, हम तुम्हारी मदद करेंगे," उसने शांति से कहा। वह घर के अंदर गई और कुछ ही देर में पचास रुपये लेकर बाहर आई।
सोमू हैरान रह गया। "नीला, हमारे पास यह पैसा कहाँ से आया? हम तो इतनी मुश्किल से गुजारा कर रहे हैं!"
नीला ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "सोमू, यह इस बात पर निर्भर नहीं करता कि हम कितना कमाते हैं, बल्कि इस पर कि हम कितना बचाते हैं। मैं हर महीने खर्चों की योजना बनाती हूँ ताकि हम केवल ज़रूरी चीज़ों पर ही पैसा खर्च करें। हम हर महीने दस रुपये बचाते हैं, और यह पैसा उसी बचत से आया है।"
सोमू को अपनी पत्नी की समझदारी पर बहुत गर्व हुआ। उसने सीखा कि कम आय में भी अनुशासन और योजना के साथ सुरक्षित रहा जा सकता है। उस दिन के बाद से, सोमू और नीला बहुत ही संतोष और समझदारी के साथ रहने लगे।
Moral
छोटी-छोटी बचत मुश्किल समय में बड़ी मदद करती है।