एक घने जंगल में कविन नाम का एक हिरण रहता था। कविन बहुत सुंदर था, विशेष रूप से उसके सिर पर बने सींग बहुत ही चमकदार और शानदार थे। एक तपती दोपहर में, जब कविन को बहुत प्यास लगी, तो वह पास के एक तालाब की ओर गया।
तालाब के साफ़ पानी में अपनी परछाई देखकर कविन गर्व से भर गया। 'वाह! मेरे सींग कितने राजसी लग रहे हैं! मैं इस जंगल का सबसे सुंदर प्राणी हूँ,' उसने मन ही मन सोचा। लेकिन जब उसने अपने पैरों की ओर देखा, तो उसे निराशा हुई। 'ये पैर कितने साधारण और बदसूरत हैं! भगवान ने मुझे इतने सुंदर सींग दिए, पर ये मामूली पैर क्यों दिए?' कविन उदास हो गया।
तभी, पास की झाड़ियों में छिपे एक तेंदुए की नज़र कविन पर पड़ी। तेंदुए को अपनी ओर आते देख कविन बुरी तरह डर गया और अपनी जान बचाने के लिए तेज़ी से भागा।
भागते समय, कविन के सुंदर सींग झाड़ियों की घनी टहनियों में फंस गए। उसने बहुत कोशिश की, लेकिन वह खुद को छुड़ा नहीं सका। 'ओह नहीं! मेरे ये सुंदर सींग ही आज मेरी जान के दुश्मन बन गए! काश मैंने अपने इन साधारण पैरों की कद्र की होती, जो मुझे भागने में मदद करते हैं!' कविन घबराकर चिल्लाया।
तेंदुआ बिल्कुल पास आ चुका था। कविन को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उसकी सुंदरता और उसका घमंड ही उसकी मौत का कारण बने।
Moral
दिखावे पर घमंड करना खतरनाक है; जो चीज़ काम आती है, वही असली संपत्ति है।