रेलवे स्टेशन पर शाम की भारी भीड़ थी। एक डिब्बे में कॉलेज के कुछ छात्र बैठे थे, जो आपस में ज़ोर-ज़ोर से बातें कर रहे थे और हँस रहे थे। जैसे ही ट्रेन आई, वे अपनी जगह बनाने में व्यस्त हो गए।
कुछ ही देर में, एक बुजुर्ग व्यक्ति और उनका पंद्रह साल का बेटा, कवि, ट्रेन में चढ़े। कवि खिड़की के पास बैठ गया और बाहर के नज़ारे देखकर दंग रह गया। जैसे ही ट्रेन चलने लगी, वह उत्साह से बोला, "पिताजी, देखिए! ये पेड़ पीछे क्यों भाग रहे हैं? क्या ये हमारे साथ दौड़ लगा रहे हैं?"
पास बैठे छात्र एक-दूसरे को देखकर मुस्कुराने लगे। "यह लड़का इतना बचकाना क्यों बातें कर रहा है?" एक छात्र ने मज़ाक उड़ाया।
कवि की खुशी कम नहीं हुई, "पिताजी, उन बादलों को देखिए! वे रुई के फाहे जैसे लग रहे हैं! और आसमान का नीला रंग कितना सुंदर है!"
छात्रों में से एक को झुंझलाहट हुई और उसने बुजुर्ग व्यक्ति से पूछा, "अंकल, आपका बेटा इतना अजीब व्यवहार क्यों कर रहा है? छोटी-छोटी बातों पर इतना शोर क्यों मचा रहा है? क्या इसे कोई समस्या है?"
पिताजी ने शांति से मुस्कुराते हुए कहा, "बच्चों, कृपया इसे गलत न समझें। कवि जन्म से देख नहीं सकता था। हाल ही में एक ऑपरेशन के ज़रिए उसे रोशनी मिली है। यह उसकी ज़िंदगी का पहला सफर है जहाँ वह अपनी आँखों से इस दुनिया को देख रहा है। उसके लिए ये पेड़, ये बादल और यह आसमान सब एक चमत्कार हैं।"
यह सुनकर छात्रों को बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ कि जिसे वे 'बचपना' समझ रहे थे, वह वास्तव में एक लड़के की खुशी का पल था। उन्होंने कवि से माफ़ी मांगी और बाकी सफर उसके साथ दुनिया की सुंदरता पर बातें करते हुए बिताया।
Moral
किसी के बारे में जाने बिना उसके व्यवहार पर टिप्पणी नहीं करनी चाहिए।