एक शांत गाँव में सोमू नाम के एक बुजुर्ग व्यक्ति रहते थे। उनका सबसे प्यारा साथी रॉकी नाम का एक कुत्ता था। कई वर्षों तक रॉकी ने सोमू के घर की रखवाली की थी, लेकिन अब रॉकी बूढ़ा हो गया था। उसकी दौड़ने की शक्ति कम हो गई थी और उसके जोड़ों में दर्द रहने लगा था।
एक सुबह जब सोमू अपने बगीचे में काम कर रहे थे, उन्होंने देखा कि एक छोटा सा खरगोश उनकी सब्जियों को कुतर रहा है। सोमू को गुस्सा आ गया। उन्होंने रॉकी की ओर इशारा करते हुए कहा, "रॉकी! जाओ और उस खरगोश को पकड़ो! वह मेरा सारा बगीचा बर्बाद कर देगा!"
रॉकी ने पूरी ताकत से दौड़ने की कोशिश की। वह कुछ ही कदम भागा, लेकिन उसकी सांस फूलने लगी और उसके पैर भारी होने लगे। खरगोश तो बहुत तेज़ी से झाड़ियों में छिप गया, लेकिन बूढ़े रॉकी के लिए उसे पकड़ना नामुमकिन था। रॉकी धीरे-धीरे चलकर सोमू के पास आया और उनके पैरों के पास बैठ गया।
सोमू ने झुँझलाकर कहा, "क्या हुआ रॉकी? क्या तुम एक छोटे से खरगोश को भी नहीं पकड़ सकते? अब तुम किसी काम के नहीं रहे!"
रॉकी ने सोमू की आँखों में देखा, जैसे वह कह रहा हो, "मालिक, मेरा मन आज भी आपकी सेवा करने और आपकी रक्षा करने का करता है। मैं चाहता हूँ कि मैं पहले की तरह फुर्तीला रहूँ, लेकिन मेरा शरीर अब मेरा साथ नहीं देता। कृपया बुढ़ापे के कारण मुझे अकेला न छोड़ें।"
उस पल सोमू को अपनी गलती का अहसास हुआ। उन्होंने सोचा कि जैसे वे खुद उम्र बढ़ने के कारण अकेलापन महसूस करते हैं, रॉकी भी वही महसूस कर रहा है। उन्होंने महसूस किया कि वफादारी ताकत से नहीं, बल्कि प्यार से मापी जाती है। सोमू ने रॉकी को गले लगा लिया और कहा, "मुझे माफ कर दो दोस्त, तुम मेरे परिवार का हिस्सा हो और हमेशा रहोगे।"
Moral
बुजुर्गों का सम्मान और देखभाल करें; वफादारी शरीर की शक्ति से नहीं, दिल से होती है।