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Moral Story

वफादार रक्षक

The Loyal Guardian

बहुत समय पहले की बात है, विक्रम नाम का एक राजा एक समृद्ध राज्य पर शासन करता था। वह बहुत दयालु था, लेकिन उसके मन में एक गहरा संदेह था। उसके महल में सैकड़ों सैनिक और सेवक थे, लेकिन वह अक्सर सोचता था कि…

4–10 yr 2 min medium
कर्तव्य और ईमानदारी ही मनुष्य की असली पहचान है।
वफादार रक्षक — NilaTales cover art
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बहुत समय पहले की बात है, विक्रम नाम का एक राजा एक समृद्ध राज्य पर शासन करता था। वह बहुत दयालु था, लेकिन उसके मन में एक गहरा संदेह था। उसके महल में सैकड़ों सैनिक और सेवक थे, लेकिन वह अक्सर सोचता था कि क्या वे वास्तव में उसके प्रति वफादार हैं या केवल उसके धन के लालच में उसके साथ हैं।

अपनी इस शंका को दूर करने के लिए, राजा ने अपने सबसे बुद्धिमान मंत्री से सलाह ली। मंत्री ने एक उपाय सुझाया, "महाराज, किसी व्यक्ति के चरित्र को जानने के लिए उसे चुनौती देना काफी नहीं है, बल्कि उसे लालच देकर परखना बेहतर है।"

अगले दिन, राजा अपने अंगरक्षकों के साथ शहर के व्यस्त बाज़ार में गया। भीड़भाड़ वाली गलियों के बीच, राजा ने अचानक अपनी थैली खोल दी और उसमें से सोने के सिक्के और कीमती रत्न सड़क पर बिखेर दिए। यह देखते ही, राजा के साथ आए सैनिक और सेवक लालच में आकर सिक्कों के पीछे भागने लगे। वे एक-दूसरे से टकराते हुए और शोर मचाते हुए धन बटोरने में लग गए।

लेकिन, कवि नाम का एक युवा सैनिक वहीं अडिग खड़ा रहा। उसने जमीन पर बिखरे रत्नों की ओर देखा तक नहीं। उसका पूरा ध्यान राजा की सुरक्षा पर था। जब सब लोग धन के लिए दौड़ रहे थे, कवि अपने भाले के साथ राजा के पास खड़ा होकर उनकी रक्षा कर रहा था।

राजा ने कवि के पास जाकर पूछा, "कवि, क्या तुम्हें ये रत्न नहीं चाहिए? तुम भी बाकी लोगों की तरह दौड़कर इन्हें ले सकते थे।"

कवि ने विनम्रता से उत्तर दिया, "महाराज, मेरा धर्म आपकी रक्षा करना है, न कि धन इकट्ठा करना। यदि मैं धन के लिए आपका साथ छोड़ दूँ, तो मैं अपना सम्मान खो दूँगा।"

कवि की इस ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से राजा बहुत प्रभावित हुआ। चूंकि राजा का कोई उत्तराधिकारी नहीं था, उसने निर्णय लिया कि कवि ही इस राज्य का अगला शासक बनेगा। वर्षों बाद, कवि एक महान राजा बना और अपनी ईमानदारी से राज्य को खुशहाल बनाया।

The Lesson

कर्तव्य और ईमानदारी ही मनुष्य की असली पहचान है।

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