एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक धोबी रहता था। उसके पास मणि नाम का एक वफादार कुत्ता और विसु नाम का एक मेहनती गधा था। मणि घर की रखवाली करता था और विसु सोमू के कपड़ों के भारी गट्ठर ढोने में मदद करता था। वे तीनों एक परिवार की तरह रहते थे।
एक दोपहर, सोमू काम करके बहुत थक गया था और पेड़ की छाया में गहरी नींद में सो गया। मणि भी सोमू के पास ही सो गया। तभी, एक चोर सोमू का सामान चुराने के इरादे से धीरे-धीरे घर की ओर बढ़ा।
जैसे ही चोर पास आया, विसु को खतरे का एहसास हुआ। वह जोर-जोर से रेंकने लगा ताकि सबको पता चल सके। विसु की तेज आवाज सुनकर चोर डर गया और वहाँ से भाग गया। शोर सुनकर सोमू और मणि अचानक जाग गए। चोर तो जा चुका था, लेकिन विसु अभी भी शोर मचा रहा था।
सोमू को बहुत गुस्सा आया। "तुम इतना शोर क्यों मचा रहे हो? क्या मुझे चैन से सोने भी नहीं दोगे?" सोमू चिल्लाया। विसु ने इशारा करने की कोशिश की कि उसने चोर को देखा है, लेकिन सोमू ने उसकी बात नहीं सुनी। गुस्से में आकर सोमू ने एक छोटी छड़ी से विसु को मार दिया।
विसु दुखी होकर सिर झुकाकर खड़ा हो गया। तभी उसे अपनी दादी की एक बात याद आई: 'दूसरों के काम में दखल देने के बजाय, अपने काम पर ध्यान देना ही बेहतर है।' विसु ने चोर को तो रोक दिया था, लेकिन उसकी वजह से सोमू की नींद खराब हुई, जिससे उसे समझ आया कि सही समय पर और सही तरीके से काम करना कितना जरूरी है।
Moral
दूसरों के मामलों में बिना वजह दखल देने के बजाय अपने कर्तव्य पर ध्यान देना चाहिए।