एक सुंदर पहाड़ी की तलहटी में एक छोटा सा गाँव था। वहाँ नेसन नाम का एक लड़का अपनी माँ के साथ रहता था। नेसन बहुत ही ईमानदार लड़का था; उसे कभी दूसरों की चीज़ों का लालच नहीं आता था। उसकी माँ उसे हमेशा सिखाती थी, 'मेहनत की कमाई में ही असली खुशी होती है।'
एक दिन, जंगल में भेड़ें चराते समय, नेसन को झाड़ियों में एक चमकती हुई छोटी लकड़ी की पेटी मिली। हैरानी की बात यह थी कि वह पेटी बोलने लगी! 'मैं एक जादुई बक्सा हूँ। तुम्हें जो चाहिए, बस मांग लो, मैं तुम्हें वह दे दूँगा,' बक्से ने कहा।
नेसन एक निस्वार्थी लड़का था, उसे धन-दौलत का कोई मोह नहीं था। उसने वह बक्सा अपनी माँ को दे दिया। लेकिन नेसन का दोस्त कथिरा ने यह सब देख लिया था। लालच में आकर कथिरा ने नेसन के घर से वह बक्सा चुरा लिया और कहा, 'मुझे बहुत सारा सोना और जवाहरात चाहिए!' बक्से ने तुरंत उसकी इच्छा पूरी कर दी।
जल्द ही इस जादुई बक्से की खबर पूरे गाँव में फैल गई। हर कोई बक्से के पास जाकर अपनी इच्छाएँ माँगने लगा। किसी को भी काम करने का मन नहीं करता था; सब आलसी हो गए। लेकिन काम न होने के कारण गाँव में झगड़े, ईर्ष्या और अशांति बढ़ने लगी। लोगों का सुख-चैन छिन गया।
गाँव की हालत बिगड़ते देख नेसन को बहुत दुख हुआ। एक दिन गाँव वाले नेसन के पास आए और बोले, 'नेसन, हमसे गलती हो गई। इस बक्से ने हमें सुख नहीं, बल्कि अशांति और आलस दिया है। कृपया हमारी मदद करो।'
नेसन ने बक्से से कहा, 'हमें और चीज़ें नहीं चाहिए, हमें बस मेहनत करने की शक्ति और शांति चाहिए।' तभी वह बक्सा गायब हो गया। गाँव वाले फिर से अपने काम में लग गए। अपनी मेहनत से गाँव फिर से खुशहाल हो गया और नेसन की ईमानदारी ने गाँव को फिर से बचा लिया।
Moral
लालच शांति छीन लेता है; कड़ी मेहनत ही सच्ची समृद्धि है।