एक समय की बात है, एक बहुत ही समृद्ध राज्य था। राजा ने अपने पुत्र को नया राजा नियुक्त किया। लेकिन सत्ता मिलते ही राजकुमार के मन में अहंकार आ गया। उसे लगा कि केवल युवा ही काम के हैं और बुजुर्ग केवल बोझ हैं।
इस गलत सोच के कारण, उसने एक कानून बनाया कि पचास वर्ष से अधिक आयु के सभी लोगों को राज्य छोड़ना होगा। अनुभवी मंत्री और बुजुर्ग भारी मन से राज्य से चले गए।
कवि नाम का एक युवा किसान अपने दादाजी से बहुत प्यार करता था। वह उन्हें अपने से दूर नहीं कर सका, इसलिए उसने उन्हें अपने घर के एक छोटे से कमरे में छिपा दिया।
कुछ ही समय बाद, राज्य में भयंकर तूफान और बाढ़ आई। खेतों में रखे सारे बीज पानी में बह गए। जब बारिश रुकी, तो राज्य में एक भी बीज नहीं बचा था। युवा किसानों को समझ नहीं आ रहा था कि खेती कैसे शुरू करें। पूरे राज्य में अकाल पड़ गया।
कवि ने घबराकर अपने दादाजी से पूछा, "दादाजी, अब हम क्या करेंगे? हमारे पास तो बीज ही नहीं हैं!"
दादाजी ने मुस्कुराते हुए कहा, "घबराओ मत कवि। यह देखो कि प्रकृति बीजों को कहाँ छिपाती है। पक्षी पुराने पेड़ों पर बैठते हैं, जिससे उनके माध्यम से बीज जमीन पर गिरते हैं। चींटियाँ भी बीजों को इकट्ठा करके अपने बिलों में रखती हैं। हमें बस उन जगहों को खोजना होगा।"
दादाजी की बात मानकर कवि ने जंगलों और चींटियों के बिलों के पास खोजबीन की। उसे बहुत सारे बीज मिल गए। उसने उन्हें बोया और फिर से खेती शुरू कर दी।
जब राजा को यह पता चला, तो उसने कवि को दरबार में बुलाया। कवि ने अपने दादाजी के बारे में सच बता दिया। राजा ने दादाजी को दरबार में बुलाया और पूछा, "आपको यह कैसे पता चला?"
दादाजी ने शांति से कहा, "महाराज, केवल बल ही काफी नहीं है, अनुभव भी जरूरी है। जो प्रकृति के संकेतों को समझता है, वही संकट से बाहर निकल सकता है।"
अपनी गलती का एहसास होने पर, राजा ने सभी बुजुर्गों को वापस बुला लिया। उनके मार्गदर्शन में राज्य फिर से खुशहाल हो गया। जब पुराने राजा को यह पता चला, तो उन्हें अपने बेटे पर गर्व हुआ कि उसने अनुभव का महत्व समझ लिया है।
Moral
अनुभव वह मार्गदर्शक है जो कठिन समय में भी रास्ता दिखाता है।