एक घने जंगल में ज़िन्नी नाम की एक छोटी सी मच्छर रहती थी। ज़िन्नी को बहुत घमंड था। उसे लगता था कि वह बहुत महत्वपूर्ण है और उसके छोटे-छोटे काम भी दुनिया के लिए बहुत बड़े हैं।
एक दोपहर ज़िन्नी को बहुत तेज़ भूख लगी। उसने पास के एक खेत में जाकर भोजन खोजने का फैसला किया। वह अपने पंख फड़फड़ाते हुए उड़ रही थी, लेकिन उड़ते-उड़ते वह बहुत थक गई। उसकी ऊर्जा खत्म हो रही थी।
तभी उसने देखा कि पास ही एक बड़ा सा बैल घास चर रहा है। ज़िन्नी ने सोचा, 'उस बैल का सींग आराम करने के लिए सबसे अच्छी जगह है।' वह चुपचाप बैल के सींग पर जाकर बैठ गई और थोड़ी देर सो गई। जब उसकी नींद खुली, तो वह फिर से तरोताजा महसूस कर रही थी।
उड़ते समय ज़िन्नी के मन में एक विचार आया, 'उस बैल ने मेरी मदद की है, मुझे उसे धन्यवाद देना चाहिए।' वह उड़कर बैल के कान के पास गई और ज़ोर से बोली, 'प्यारे बैल भाई! जब मैं थक गई थी, तब आपने मुझे आराम करने के लिए जगह दी, उसके लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद!'
बैल ने शांति से घास चबाते हुए कहा, 'नन्ही मच्छर, तुम मुझे धन्यवाद क्यों दे रही हो? मुझे तो पता भी नहीं चला कि तुम वहाँ थी। तुम अपना काम करो और मैं अपना काम करता हूँ।'
ज़िन्नी सन्न रह गई। उसे समझ आया कि वह जितनी महत्वपूर्ण खुद को समझती थी, असल में उतनी थी नहीं। उसका घमंड टूट गया और उसे अपनी गलती का एहसास हुआ।
Moral
अहंकार में आकर खुद को बहुत बड़ा समझना गलत है।