एक विशाल जंगल में कलिंगन नाम का एक शक्तिशाली शेर रहता था। वह केवल जंगल का राजा ही नहीं था, बल्कि बहुत दयालु भी था। उसका एक चतुर लोमड़ी दोस्त था।
एक बार जंगल में भीषण सूखा पड़ा। नदियाँ और तालाब सूख गए। सभी जानवर प्यास से व्याकुल होने लगे। यह देखकर लोमड़ी ने शेर से कहा, "महाराज, आपकी गुफा के पीछे एक पुराना कुआँ है जिसमें अभी भी पानी है। अगर आप इसे गुप्त रखें और केवल अपने लिए इस्तेमाल करें, तो बारिश आने तक आपको कोई परेशानी नहीं होगी।"
शुरुआत में शेर ने सोचा कि वह पानी केवल अपने पास रखे। लेकिन जब उसने प्यासे हिरणों और पक्षियों को देखा, तो उसका हृदय पिघल गया। उसने सोचा कि एक राजा का धर्म सबकी रक्षा करना है। उसने सभी जानवरों की एक सभा बुलाई।
शेर ने घोषणा की, "मित्रों, इस कुएँ में पानी बहुत कम है। यह ज्यादा दिन नहीं चलेगा। क्यों न हम सब मिलकर एक बड़ा नया तालाब खोदें? यदि आप तालाब बनाने में मेरी मदद करेंगे, तो मैं इस कुएँ का पानी ज़रूरत पड़ने पर आप सभी के साथ बाँटूंगा।"
सभी जानवर शेर की बात से सहमत हो गए। हाथियों ने भारी पत्थर हटाए, बंदरों ने टहनियाँ साफ कीं और छोटे जानवरों ने मिट्टी को समतल करने में मदद की। सबने मिलकर कड़ी मेहनत की।
जल्द ही एक बड़ा और सुंदर तालाब तैयार हो गया। ठीक उसी समय मानसून की बारिश भी शुरू हो गई। नया तालाब और पुराना कुआँ दोनों पानी से भर गए। जंगल फिर से हरा-भरा और खुशहाल हो गया। लोमड़ी को अपनी स्वार्थी सलाह पर बहुत शर्मिंदगी महसूस हुई। शेर की समझदारी ने पूरे जंगल को बचा लिया था।
Moral
स्वार्थ त्यागकर मिल-जुलकर काम करने से सबका भला होता है।