एक शांत गाँव में सोमू नाम का एक किसान रहता था। उसके चार बेटे थे, लेकिन वे चारों बहुत आलसी थे। उन्हें काम करना बिल्कुल पसंद नहीं था और वे अपना सारा समय बेकार की चीज़ों में बिताते थे।
एक दिन सोमू ने अपने बेटों को बुलाया और कहा, "मेरे बच्चों, हमारे खेत में एक बहुत बड़ा खजाना छिपा है। वह सोने और जवाहरात से भरा हुआ है।"
बेटों की आँखें चमक उठीं। "पिताजी, वह खजाना कहाँ है?" उन्होंने उत्सुकता से पूछा।
सोमू ने कहा, "मेरी याददाश्त अब उतनी तेज़ नहीं रही, इसलिए मुझे सटीक जगह तो नहीं पता, लेकिन वह हमारे खेत में ही कहीं है।"
कुछ समय बाद सोमू की मृत्यु हो गई। खजाना पाने के लालच में, चारों भाई खेत में पहुँच गए और खुदाई करने लगे। उन्होंने पूरा खेत खोद डाला, लेकिन उन्हें सोना नहीं मिला।
हालाँकि, खुदाई करने के कारण मिट्टी बहुत नरम हो गई थी और ज़मीन के नीचे से पानी का एक स्रोत निकल आया था। खेत पूरी तरह से उपजाऊ और पानी से भरा हो गया था। एक अनुभवी किसान ने उन्हें देखकर कहा, "बच्चों, तुमने खेत को बहुत अच्छे से तैयार कर दिया है। अब अगर तुम बीज बोओगे, तो बहुत अच्छी फसल होगी।"
भाइयों ने बीज खरीदे और खेत में बो दिए। मिट्टी में नमी होने के कारण फसल बहुत जल्दी और अच्छी तरह बढ़ी। जब उन्होंने फसल बेची, तो उन्हें बहुत सारा पैसा मिला। तब उन्हें समझ आया कि पिताजी ने जो खजाना बताया था, वह सोना नहीं था, बल्कि उनकी मेहनत से मिली यह कमाई ही असली खजाना थी।
उस दिन के बाद से, उन्होंने आलस छोड़ दिया और मेहनती बन गए।
Moral
कठिन परिश्रम ही जीवन का असली खजाना है।