एक सुंदर तालाब के किनारे मणि और सोमू नाम के दो मेंढक दोस्त रहते थे। सोमू अपने तालाब के जीवन से खुश था, लेकिन मणि हमेशा कुछ नया देखने का सपना देखता था। एक सुबह मणि ने उत्साह से कहा, "सोमू, क्यों न हम उस बड़े शहर को देखने चलें? मैंने सुना है कि वहाँ बहुत सी अद्भुत चीज़ें हैं!"
सोमू पहले तो थोड़ा डरा, लेकिन अपने दोस्त का साथ देने के लिए वह मान गया। "ठीक है मणि, चलो चलते हैं," उसने कहा।
दोनों ने अपनी यात्रा शुरू की। छोटे पत्थरों और लंबी घास के बीच से होते हुए वे धीरे-धीरे आगे बढ़े। काफी देर चलने के बाद, वे एक छोटी पहाड़ी के पास पहुँचे। मणि हाँफते हुए बोला, "सोमू, हम बस पहुँचने ही वाले हैं! उस पहाड़ी के ठीक पीछे वह शहर होगा!"
सोमू ने खुद देखने के लिए मणि की पीठ पर चढ़कर ऊपर से झाँका। लेकिन उसे वहाँ वही घास, वही पेड़ और वही तालाब दिखाई दिया जो उनके घर के पास था। सोमू नीचे उतरा और बोला, "मणि, तुम सही कह रहे थे! वह शहर तो बिल्कुल हमारे गाँव जैसा ही दिखता है! यहाँ जैसे पेड़ और घास हैं, वहाँ भी वैसी ही है!"
मणि ने गर्व से कहा, "हाँ सोमू, उस शहर में कुछ भी नया नहीं है। हमने इतनी दूर चलकर बस यही जाना कि शहर हमारे घर जैसा ही है। चलो वापस चलते हैं!"
दोनों खुशी-खुशी अपने तालाब की ओर लौट आए और सबको बताने लगे कि शहर में कुछ खास नहीं है। उन्होंने कभी यह नहीं सोचा कि दुनिया उनके छोटे से तालाब से कहीं बड़ी है।
Moral
जिज्ञासा के बिना, हम कभी भी नई और बड़ी दुनिया को नहीं जान पाते।