एक सुंदर से गाँव में कवि नाम का एक लड़का रहता था। कवि बुद्धिमान तो था, लेकिन उसके मन में चार बुराइयाँ थीं: ईर्ष्या, लालच, गुस्सा और कड़वी बातें। जब भी उसके दोस्त नई चीज़ें लाते, उसे जलन होती थी। जब उसे कुछ चाहिए होता और वह नहीं मिलता, तो वह लालच में आ जाता। गुस्से में वह अक्सर दूसरों को बुरा-भला कह देता था।
एक बार गाँव में चित्रकला प्रतियोगिता हुई। कवि के दोस्त अर्जुन ने एक बहुत सुंदर चित्र बनाया। उसे देखकर कवि को जलन हुई। जब अर्जुन प्रतियोगिता जीत गया, तो कवि गुस्से में चिल्लाया, 'तुम सिर्फ किस्मत से जीते हो, तुम्हारा चित्र अच्छा नहीं है!' अर्जुन बहुत दुखी हुआ और वहाँ से चला गया।
उस शाम कवि के दादाजी ने उसे समझाया, 'बेटा, यदि तुम्हारे मन में ईर्ष्या, लालच, क्रोध और कड़वे शब्द रहेंगे, तो तुम्हारी अच्छाई कभी किसी को दिखाई नहीं देगी।' कवि को अपनी गलती का एहसास हुआ। अगले दिन वह अर्जुन के पास गया और उससे माफी मांगी। उसने वादा किया कि वह अब से हमेशा मीठा बोलेगा और अपने मन को शांत रखेगा। धीरे-धीरे कवि एक बहुत ही प्यारा और नेक लड़का बन गया।