एक छोटे से गाँव में सोमू और नीला अपने पाँच साल के बेटे थरण के साथ रहते थे। एक दोपहर, नीला ने थरण के लिए दाल-चावल बनाया। थरण बहुत उत्साह से खाना खा रहा था, और अपने नन्हे हाथों से चावल के साथ खेलते हुए उसने उसे थोड़ा इधर-उधर फैला भी दिया।
उसी शाम, सोमू को एक बहुत बड़ी दावत में जाने का मौका मिला। वहाँ दुनिया भर के कीमती पकवान और अमृत जैसे मीठे व्यंजन परोसे जा रहे थे। सोमू ने वे सब चीज़ें चखीं, लेकिन उसका मन घर पर ही अटका था। जब वह घर लौटा, तो उसे थरण के हाथ से खाए हुए उस साधारण चावल की याद आई। उसने महसूस किया कि दुनिया के सबसे महंगे और स्वादिष्ट पकवान भी उस सादे भोजन की मिठास का मुकाबला नहीं कर सकते, जिसमें उसके बच्चे के नन्हे हाथों का प्यार और स्पर्श शामिल था। उसके लिए, थरण के हाथों से छुआ हुआ वह चावल अमृत से भी कहीं अधिक मीठा था।