एक शांत गाँव में आदित्य नाम का एक लड़का रहता था। वह अपने पिता के साथ मिट्टी के बर्तन बनाने के काम में मदद करता था। आदित्य बहुत मेहनती था, लेकिन उसकी एक आदत थी—जब कुछ अच्छा होता, तो वह खुशी से झूम उठता, और जब कुछ बुरा होता, तो वह बहुत उदास हो जाता था।
एक दिन, गाँव के उत्सव के लिए आदित्य द्वारा बनाए गए सभी बर्तन बिक गए। वह बहुत खुश था और गर्व से सबको बता रहा था, "मैं दुनिया का सबसे अच्छा कुम्हार हूँ!" लेकिन अगले ही दिन, एक बड़ा और सुंदर घड़ा गलती से टूट गया। आदित्य फूट-फूट कर रोने लगा, "सब खत्म हो गया! मैं बहुत बुरा हूँ!"
उसके पिता उसके पास आए और प्यार से बोले, "आदित्य, लाभ और हानि जीवन के दो पहलू हैं। लाभ होने पर अहंकार नहीं करना चाहिए और हानि होने पर हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। एक बुद्धिमान व्यक्ति वही है जो दोनों स्थितियों में अपने मन को शांत और स्थिर रखे।"
आदित्य ने अपने आँसू पोंछे और फिर से काम में जुट गया। कुछ ही दिनों में, उसके बनाए नए बर्तन पहले से भी ज़्यादा बिकने लगे। इस बार जब उसे सफलता मिली, तो वह शांत रहा। उसने सीख लिया था कि मन को कैसे काबू में रखा जाता है।