एक सुंदर से गाँव में कवि और रोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। कवि बहुत गुस्सैल था; अगर कोई छोटी सी गलती भी कर देता, तो वह चिल्लाने लगता था। वहीं रोहन बहुत शांत स्वभाव का था; लोग गुस्सा करते, फिर भी वह मुस्कुराकर बात टाल देता था।
एक बार गाँव के मेले में जाते समय, एक छोटे बच्चे ने गलती से रोहन के पैर से टक्कर मार दी। कवि तुरंत चिल्लाया, 'देखकर नहीं चल सकते क्या? क्या तुम्हें आँखें नहीं दिखतीं?' बच्चा डर गया और रोने लगा। लेकिन रोहन ने प्यार से बच्चे के सिर पर हाथ रखा और कहा, 'कोई बात नहीं बेटा, अगली बार ध्यान रखना।'
शाम को गाँव के मुखिया ने एक सभा बुलाई। उन्होंने कहा, 'कवि का गुस्सा लोगों को उससे दूर करता है, लेकिन रोहन का धैर्य लोगों को उसके करीब लाता है। जैसे हम सोने को बहुत संभाल कर और कीमती मानकर रखते हैं, वैसे ही धैर्यवान व्यक्ति भी सोने के समान अनमोल होता है।' गाँव वालों ने रोहन की शांति की सराहना की और उसे अपना सबसे प्रिय मित्र माना।