एक सुंदर गाँव में सोमू नाम का एक किसान रहता था। वह बहुत दयालु था और हमेशा दूसरों की मदद करता था। उसके पड़ोसी रवि के पास सोमू से कहीं अधिक ज़मीन और पशु थे।
एक बार गाँव में भीषण सूखा पड़ा। सोमू की फसलें सूख गईं और उसके परिवार के सामने खाने का संकट खड़ा हो गया। रवि के अनाज के भंडार को देखकर सोमू के मन में एक बुरा विचार आया। उसने सोचा, 'अगर मैं रवि का थोड़ा अनाज चुरा लूँ, तो मेरा परिवार भूखा नहीं मरेगा।'
एक रात, जब सोमू चोरी करने के इरादे से रवि के गोदाम की ओर जा रहा था, उसकी पत्नी नीला ने उसे देख लिया। नीला ने उसे डांटा नहीं, बल्कि प्यार से समझाया, 'सोमू, भले ही हम आज भूखे हों, लेकिन दूसरों की संपत्ति का लालच करके गलत रास्ता चुनना हमें विनाश की ओर ले जाएगा। ईमानदारी से जीना ही सबसे बड़ा धन है।'
नीला की बात सुनकर सोमू को अपनी गलती का अहसास हुआ। उसने चोरी करने का विचार छोड़ दिया। कुछ समय बाद बारिश हुई और सोमू ने अपनी मेहनत से फिर से खेती शुरू की। सोमू की ईमानदारी देखकर रवि ने भी उसकी मदद की। सोमू समझ गया कि गलत तरीके से कमाया गया धन कभी सुख नहीं देता।