एक छोटे से गाँव में माधव नाम का एक वृद्ध किसान रहता था। उसके पास बहुत कम संपत्ति थी। माधव का एक बेटा था, जिसका नाम अर्जुन था।
एक बार गाँव में भीषण सूखा पड़ा। खाने की बहुत कमी हो गई। माधव ने अपनी थोड़ी सी अनाज की पोटली एक भूखे यात्री को दे दी। अर्जुन ने यह देखकर पूछा, "पिताजी, हमारे पास खुद के लिए ही कम है, फिर आप दूसरों को क्यों दे रहे हैं?"
माधव मुस्कुराया और बोला, "बेटा, दूसरों की मदद करने से जो खुशी मिलती है, वह अकेले भोजन करने के स्वाद से कहीं अधिक मीठी होती है।"
कई साल बीत गए। माधव बहुत बूढ़ा हो गया और बीमार पड़ गया। अपने अंतिम समय में, अर्जुन उसके पास बैठकर रो रहा था। लेकिन माधव के चेहरे पर एक शांति थी। मरने से ठीक पहले, उसने अपनी अंतिम शक्ति जुटाकर एक जरूरतमंद की मदद की और मुस्कुराते हुए प्राण त्याग दिए। अर्जुन ने महसूस किया कि मृत्यु कठिन है, लेकिन दूसरों के काम आकर जाना जीवन के अंत को भी सुखद बना देता है।