एक सुंदर से गाँव में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो बहुत ताकतवर और फुर्तीला था, लेकिन कभी-कभी उसे अपनी ताकत पर बहुत घमंड हो जाता था। एक दोपहर, जब वह अपने बगीचे में खेल रहा था, उसने चींटियों की एक कतार को खाना ले जाते हुए देखा। लियो को शरारत सूझी और उसने चींटियों को डराना शुरू कर दिया। वह अपने पैरों से ज़मीन पटकते हुए हँस रहा था, 'देखो ये कितनी छोटी और कमज़ोर हैं! मैं चाहूँ तो इन्हें एक पल में कुचल सकता हूँ!'
तभी उसका बड़ा भाई सैम वहाँ आया। लियो को ऐसा करते देख सैम ने शांति से पूछा, 'लियो, तुम इन नन्हे जीवों के साथ ऐसा क्यों कर रहे हो?' लियो ने सीना तानकर कहा, 'क्योंकि मैं बड़ा और ताकतवर हूँ, और ये कुछ भी नहीं हैं!'
सैम ने लियो की आँखों में देखते हुए कहा, 'लियो, क्या तुम्हें याद है पिछले हफ्ते जब हम जंगल में गए थे? जब अचानक तेज़ गड़गड़ाहट हुई और अंधेरा छा गया, तब तुम डर के मारे काँप रहे थे। उस समय तुम्हें कैसा महसूस हुआ था? तुम कितने असहाय थे, है ना? बस वही बात याद रखो। तुम इन चींटियों से बड़े हो सकते हो, लेकिन तुम भी कभी कमज़ोर महसूस कर चुके हो। इसलिए, जो तुमसे छोटे हैं, उनके प्रति दया दिखाओ, क्रूरता नहीं।'
लियो की हँसी रुक गई। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। उसे वह डर याद आया जो उसने जंगल में महसूस किया था। उस दिन के बाद से, लियो ने सीखा कि असली ताकत दूसरों को डराने में नहीं, बल्कि उनकी रक्षा करने में है।