एक छोटे से गाँव में किरण नाम का एक लड़का रहता था। उसे अपने खिलौनों से बहुत लगाव था। उसका सबसे अच्छा दोस्त अर्जुन एक दिन उसके घर खेलने आया। किरण ने अपनी नई लकड़ी की नाव मेज पर रखी और बाहर खेलने चला गया। अर्जुन ने जब उस सुंदर नाव को देखा, तो वह खुद को रोक नहीं पाया। उसने जैसे ही उसे छुआ, नाव का एक हिस्सा टूट गया।
अर्जुन घबरा गया। उसे पता था कि किरण को उस नाव से कितना प्यार है। उसने सोचा, 'अगर मैं इसे छिपा दूँ, तो किरण को पता नहीं चलेगा।' लेकिन फिर उसे एहसास हुआ कि अगर किरण को बाद में पता चला, तो उसे कितना दुख होगा। उसने सोचा कि दूसरों को कष्ट देने वाली बात करना गलत है।
जब किरण वापस आया, तो अर्जुन ने हिम्मत जुटाई और सच बता दिया। 'किरण, मुझे माफ कर दो। मैं तुम्हारी नाव देख रहा था और वह टूट गई।' किरण को पहले तो बहुत दुख हुआ, लेकिन अर्जुन की ईमानदारी देखकर उसका गुस्सा शांत हो गया। उसने कहा, 'नाव टूटने का मुझे दुख है, पर तुमने सच बोला यह अच्छी बात है। हम इसे ठीक कर लेंगे।' दोनों ने मिलकर नाव को जोड़ा। अर्जुन ने सीखा कि हमें कभी भी ऐसा काम नहीं करना चाहिए जिससे दूसरों को ठेस पहुँचे।