एक शांत गाँव में लियो नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। लियो बहुत ही चंचल और प्यारा बच्चा था, लेकिन खेलते समय वह अक्सर अनजाने में छोटी चींटियों या कीड़ों को कुचल देता था।
एक सुनहरी दोपहर, लियो ने एक बहुत ही सुंदर नीली तितली देखी। वह इतनी प्यारी थी कि लियो का मन हुआ कि उसे पकड़ ले। उसने सोचा, 'मैं इसे एक डिब्बे में रखूँगा और सबको दिखाऊँगा!' वह दबे पाँव तितली की ओर बढ़ने लगा।
तभी उसके दादाजी ने उसे रोक लिया। "लियो, रुको!" उन्होंने प्यार से कहा।
लियो ने कहा, "लेकिन दादाजी, देखिए यह कितनी सुंदर है! मैं बस इसे छूना चाहता हूँ।"
दादाजी ने उसे अपने पास बिठाया और समझाया, "लियो, क्या तुम जानते हो कि एक अच्छा इंसान बनने का सही रास्ता क्या है? सही रास्ता वह है जिसमें हम किसी भी जीव को नुकसान न पहुँचाएँ और न ही किसी की जान लें। यह तितली उड़ने के लिए बनी है, इसे कैद करने के लिए नहीं। जब तुम इसे पकड़ने की कोशिश करते हो, तो तुम इसकी आज़ादी छीन लेते हो। हर छोटे जीव के प्रति दया भाव रखना ही सबसे बड़ा धर्म है।"
लियो ने देखा कि जब वह पास जा रहा था, तो तितली कितनी डर रही थी। उसे अपनी गलती का अहसास हुआ। लियो ने धीरे से अपना हाथ पीछे खींच लिया। तितली अपने पंख फड़फड़ाकर नीले आसमान में उड़ गई। उसे आज़ाद उड़ते देख लियो को जो खुशी मिली, वह उसे तितली को पकड़कर नहीं मिलती। उस दिन के बाद, लियो ने हर छोटे जीव का सम्मान करना सीख लिया।