एक सुंदर से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसके पास लकड़ी का एक बहुत प्यारा खिलौना था, जिसे वह अपनी जान से भी ज्यादा चाहता था। एक दिन अपने दोस्त रोहन के साथ खेलते समय, वह खिलौना अचानक गिरकर टूट गया। अर्जुन फूट-फूट कर रोने लगा। उसे लगा जैसे उसका सब कुछ छिन गया हो।
तभी उसके दादाजी उसके पास आए और बोले, 'अर्जुन बेटा, इस दुनिया में कोई भी चीज़ हमेशा के लिए नहीं रहती। चीज़ें आती हैं और चली जाती हैं। तुम्हारी उदासी का कारण खिलौना टूटना नहीं, बल्कि उस खिलौने के प्रति तुम्हारा बहुत अधिक लगाव है। यदि तुम चीज़ों से बहुत अधिक मोह नहीं रखोगे, तो तुम कभी दुखी नहीं होगे।'
अर्जुन ने दादाजी की बात पर गौर किया। उसे समझ आया कि उसकी बेचैनी उस खिलौने के प्रति उसकी अत्यधिक इच्छा से पैदा हुई थी। उसने सीखा कि वस्तुओं का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन मन की शांति बनाए रखना हमारे हाथ में है। उस दिन के बाद, अर्जुन ने चीजों का आनंद लेना तो सीखा, लेकिन उनके खोने पर विचलित होना छोड़ दिया।