एक सुंदर से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। कविन बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसकी एक बुरी आदत थी—दूसरों की गलतियाँ निकालकर उनका मज़ाक उड़ाना। एक दिन स्कूल में उसका दोस्त रवि एक चित्र बना रहा था। रवि ने एक रेखा थोड़ी टेढ़ी खींच दी, तो कविन ज़ोर से हँसते हुए बोला, 'रवि, तुम्हें तो चित्र बनाना भी नहीं आता! कितना बुरा चित्र है!' रवि शर्मिंदा होकर सिर झुकाकर बैठ गया।
उस शाम, कविन के दादाजी ने उसे एक पुराना लकड़ी का बक्सा दिया। उसमें एक अजीब सा आईना था। दादाजी ने कहा, 'कविन, यह एक जादुई आईना है। इसमें जो भी देखेगा, उसे केवल अपनी गलतियाँ ही दिखाई देंगी।' कविन बहुत उत्साहित था। घर जाते समय उसने देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति ने सड़क पर कूड़ा फेंक दिया। कविन ने आईने से देखा, तो उस व्यक्ति के चेहरे पर एक काला धब्बा दिखा। कविन हँसा। लेकिन फिर उसने उत्सुकता में आईना अपने चेहरे की ओर कर लिया। कविन डर गया! आईने में उसके अपने चेहरे पर एक बहुत बड़ा काला धब्बा दिख रहा था। यह धब्बा उसके दूसरों का मज़ाक उड़ाने की वजह से था।
कविन समझ गया कि दूसरों की कमियाँ ढूँढने के चक्कर में वह अपनी सबसे बड़ी कमी को भूल गया था। उस दिन के बाद, कविन ने दूसरों का मज़ाक उड़ाना छोड़ दिया। उसने अपनी गलतियों को सुधारने और दूसरों की मदद करने पर ध्यान दिया। गाँव के सभी लोग उसके इस बदलाव से बहुत खुश हुए।