एक सुंदर से गाँव में कविन नाम का एक लड़का रहता था। कविन बहुत बुद्धिमान था, लेकिन उसे एक गलतफहमी थी कि वह सबसे श्रेष्ठ है। उसके पुराने दोस्त बहुत ही मेहनती और अच्छे थे। लेकिन धीरे-धीरे कविन ने विक्रम नाम के लड़के के साथ समय बिताना शुरू कर दिया। विक्रम को पढ़ाई में कोई दिलचस्पी नहीं थी और वह हमेशा शरारतें करने और समय बर्बाद करने में लगा रहता था।
एक दोपहर, कविन के पिता ने उसे एक ज़रूरी काम के लिए बुलाया। तभी विक्रम वहाँ आया और बोला, "छोड़ो ये काम कविन, चलो खेलने चलते हैं!" कविन पहले तो हिचकिचाया, लेकिन विक्रम के कहने पर वह काम छोड़कर खेलने चला गया। कविन की अनुपस्थिति के कारण उसके पिता को काम में बहुत मुश्किल हुई और एक ज़रूरी काम बिगड़ गया। कविन को अपनी गलती पर बहुत पछतावा हुआ।
शाम को कविन के दादाजी ने उसे समझाया, "कविन, तुम्हें लग सकता है कि तुम्हारी बुद्धि केवल तुम्हारे मन में है। लेकिन असल में, तुम्हारी बुद्धि तुम्हारे मित्रों से झलकती है। यदि तुम विक्रम जैसे लोगों के साथ रहोगे, तो तुम गलत रास्ते पर निकल जाओगे। लेकिन अच्छे मित्र तुम्हें सही राह दिखाएंगे।" कविन को अपनी भूल समझ आ गई। उसने फिर से अपने पुराने अच्छे दोस्तों के साथ समय बिताना शुरू किया और जीवन में फिर से सफल होने लगा।