एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। उसका दिल बहुत साफ़ था और वह हमेशा दूसरों की मदद करना चाहता था। एक दिन उसने अपने दोस्त रोहन को बहुत उदास देखा। रोहन का पालतू पिल्ला खो गया था। अर्जुन ने सोचा, 'मैं रोहन को खुश करने के लिए कुछ खास करूँगा।' वह बाज़ार गया और अपनी जमा पूँजी से एक बहुत ही सुंदर खिलौना कुत्ता खरीद लाया।
अर्जुन ने बड़े उत्साह के साथ रोहन को वह खिलौना दिया। लेकिन रोहन खुश होने के बजाय और भी ज़ोर से रोने लगा। अर्जुन हैरान रह गया। उसे बहुत बुरा लगा कि उसने इतनी अच्छी चीज़ की, फिर भी रोहन दुखी क्यों है?
पास ही खड़ी एक दादी माँ ने अर्जुन को समझाया, 'बेटा, तुम्हारी नीयत तो अच्छी थी, लेकिन तुमने रोहन की ज़रूरत को नहीं समझा। रोहन को खिलौना नहीं, बल्कि अपने असली दोस्त की तलाश में मदद चाहिए। जब हम किसी के मन की स्थिति जाने बिना कुछ करते हैं, तो हमारी भलाई भी बेकार जा सकती है।'
अर्जुन को अपनी गलती समझ आ गई। अगले दिन, उसने रोहन के साथ मिलकर पिल्ले को ढूँढने में उसकी मदद की। अंत में, उन्हें पिल्ला मिल गया और रोहन खुशी से झूम उठा। अर्जुन समझ गया कि सच्ची मदद वही है जो सामने वाले की भावना को समझकर की जाए।