एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। एक दिन बगीचे में खेलते समय अर्जुन को एक बड़ा और रसीला आम मिला। उसने सोचा, 'अगर मैं यह आम अकेले खाऊँगा, तो मुझे बहुत मज़ा आएगा।' उसने आम को चुपके से अपने कमरे में छिपा लिया।
तभी उसकी छोटी बहन मीरा वहाँ आई और पूछा, 'भैया, क्या आपके पास कोई फल है?' अर्जुन ने उसे मना कर दिया और झूठ बोल दिया कि उसके पास कुछ नहीं है। मीरा उदास होकर चली गई। अर्जुन ने कमरे में बैठकर आम खाना शुरू किया, लेकिन उसे वह स्वाद नहीं आ रहा था जो उसे आना चाहिए था। अकेले खाने में उसे एक अजीब सी उदासी महसूस हो रही थी।
तभी उसके दादाजी ने आवाज़ दी, 'अर्जुन! बाहर आओ, आज बगीचे में बहुत सारे फल हैं। अपनी बहन मीरा को भी बुला लो और सब मिलकर खाओ!' अर्जुन को अपनी गलती का एहसास हुआ। वह दौड़कर मीरा के पास गया, उससे माफ़ी माँगी और उसे साथ लेकर आया। जब दोनों ने मिलकर आम खाया, तो अर्जुन को लगा कि आम पहले से कहीं ज़्यादा मीठा है। उसने सीखा कि असली खुशी अकेले में नहीं, बल्कि अपनों के साथ बाँटने में है।