एक सुंदर से गाँव में करी नाम का एक लड़का रहता था। वह बहुत प्रतिभाशाली था, लेकिन उसमें एक कमी थी—वह बिना सोचे-समझे बहुत जल्दबाजी में काम करता था। उसके पिता एक कुशल कुम्हार थे। एक बार गाँव के उत्सव के लिए एक बड़ा मिट्टी का घड़ा बनाने की जिम्मेदारी करी को दी गई।
करी बहुत उत्साहित था। उसके पास सबसे अच्छी मिट्टी और सुंदर नक्काशी करने वाले औज़ार थे। लेकिन, जल्दी काम खत्म करने की हड़बड़ी में उसने यह नहीं सोचा कि घड़े का आधार कितना मजबूत होना चाहिए। उसने बहुत ही पतला आधार बना दिया।
अगले दिन घड़ा देखने में बहुत सुंदर लग रहा था। करी बहुत खुश था। लेकिन जैसे ही उसने उसमें पानी भरने की कोशिश की, वह पतला आधार वजन नहीं सह पाया और घड़ा टूटकर बिखर गया। करी रोने लगा। उसके पास मौजूद बेहतरीन औज़ार और अच्छी मिट्टी भी उसे बचा नहीं सके।
तब उसके पिता ने उसे समझाया, 'करी, एक डरपोक व्यक्ति के पास चाहे कितनी भी बड़ी किलेबंदी क्यों न हो, वह उसकी रक्षा नहीं कर सकती। ठीक उसी तरह, जो व्यक्ति बिना सोचे-समझे काम करता है, उसके पास चाहे कितने भी साधन क्यों न हों, वे उसके काम नहीं आते।' उस दिन के बाद से, करी ने हर काम सावधानी और सोच-समझकर करना सीख लिया।