एक छोटे से गाँव में अर्जुन और रोहन नाम के दो दोस्त रहते थे। अर्जुन बहुत मेहनती था, जबकि रोहन बहुत आलसी था। एक बार गाँव के मुखिया ने उन्हें खेती के लिए दो बराबर खेत दिए और कहा, 'मेहनत करोगे तो ही फसल मिलेगी।'
अर्जुन रोज़ सुबह सूरज निकलने से पहले खेत पर पहुँच जाता था। वह मिट्टी खोदता, बीज बोता और पौधों को पानी देता। चाहे तेज़ धूप हो या बारिश, वह कभी नहीं रुका। दूसरी ओर, रोहन हमेशा सोचता, 'अभी तो बहुत समय है, थोड़ी देर सो लेता हूँ।' वह अपना सारा दिन आराम करने में बिता देता।
कुछ महीनों बाद, अर्जुन का खेत लहलहाती फसलों से भर गया। उसने अनाज बेचकर बहुत धन कमाया। लेकिन रोहन का खेत सिर्फ खरपतवार और झाड़ियों से भरा था। रोहन जब भूखा और दुखी बैठा था, तब अर्जुन ने उससे कहा, 'दोस्त, आलस इंसान को गरीबी की ओर ले जाता है, जबकि मेहनत उसे समृद्धि की ओर ले जाती है।' रोहन को अपनी गलती समझ आ गई और उसने अगले दिन से कड़ी मेहनत करने का संकल्प लिया।