एक सुंदर से गाँव में कार्तिक नाम का एक लड़का रहता था। उसे पेड़-पौधों से बहुत प्यार था। उसके पिता एक छोटा सा सब्जी का बगीचा उगाते थे। एक साल गाँव में भीषण सूखा पड़ा। बारिश बिल्कुल नहीं हुई और बगीचे के सारे पौधे सूखने लगे। गाँव के लोग निराश होकर कहने लगे, 'अब यहाँ कुछ नहीं बचा, हमें यह गाँव छोड़ना होगा।'
लेकिन कार्तिक ने हार नहीं मानी। उसने अपने पिता से कहा, 'पिताजी, अगर हम कोशिश करना छोड़ देंगे, तभी सब खत्म हो जाएगा। हमें लड़ना चाहिए।' कार्तिक हर सुबह सूरज निकलने से पहले उठ जाता और दूर की नदी से बाल्टियों में पानी भरकर लाता और एक-एक पौधे को पानी देता। धूप और थकान के बावजूद वह नहीं रुका।
कार्तिक की लगन देखकर गाँव के कुछ लोग भी उसकी मदद करने लगे। कुछ ही दिनों बाद आसमान में काले बादल छा गए और ज़ोरदार बारिश हुई! कार्तिक की मेहनत की वजह से पौधे फिर से हरे-भरे हो गए। कार्तिक के साहस ने न केवल बगीचे को, बल्कि उसके परिवार की उम्मीद को भी बचा लिया।