एक शांत गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। अर्जुन बहुत भावुक था; अगर उसे उसकी पसंद की मिठाई न मिले या खेलते समय वह गिर जाए, तो वह तुरंत रोने लगता था। वह चाहता था कि जीवन हमेशा खुशियों से भरा रहे।
एक दिन अर्जुन ने अपने बगीचे में एक छोटा सा गुलाब का पौधा लगाया। वह रोज़ उसे पानी देता और बड़े चाव से उसके फूलों का इंतज़ार करता। लेकिन कुछ ही दिनों बाद, गाँव में तेज़ तूफ़ान और बारिश आई। अगली सुबह जब अर्जुन बगीचे में गया, तो उसने देखा कि उसका नन्हा पौधा मिट्टी में दब गया है और टूट गया है।
अर्जुन फूट-फूट कर रोने लगा। दादाजी उसके पास आए और प्यार से उसके सिर पर हाथ रखा। 'क्या हुआ अर्जुन? तुम इतने दुखी क्यों हो?' उन्होंने पूछा।
'दादाजी, मैंने इसकी इतनी देखभाल की, फिर भी यह क्यों टूट गया?' अर्जुन सिसकते हुए बोला।
दादाजी ने शांति से कहा, 'बेटा, जैसे सूरज के बाद बादल आते हैं, वैसे ही जीवन में सुख के बाद दुख भी आता है। यह प्रकृति का नियम है। अगर हम केवल सुख की ही तलाश करेंगे, तो दुख आने पर हम टूट जाएंगे। लेकिन अगर हम यह समझ लें कि मुश्किलें जीवन का एक स्वाभाविक हिस्सा हैं, तो वे हमें कभी हरा नहीं पाएंगी। रोने के बजाय, चलो देखते हैं कि हम इस पौधे को फिर से कैसे खड़ा कर सकते हैं।'
अर्जुन ने आँसू पोंछे और दादाजी की मदद से पौधे को फिर से सीधा खड़ा कर दिया। उस दिन के बाद, अर्जुन ने सीखा कि जीवन में आने वाली चुनौतियों से घबराना नहीं चाहिए, बल्कि उन्हें स्वीकार करना चाहिए।