एक छोटे से गाँव में कविन नाम का एक लड़का अपने दादाजी के साथ रहता था। कविन को बागवानी का बहुत शौक था। एक साल गाँव में भीषण सूखा पड़ा। कविन के लगाए हुए सुंदर फूल मुरझाने लगे। कविन बहुत दुखी होकर रोने लगा, 'दादाजी, सब कुछ खत्म हो गया! अब मैं खुश कैसे रहूँगा?'
उसके दादाजी ने उसे पास बिठाया और प्यार से कहा, 'कविन, उदास मत हो। यह सूखा बस कुछ समय के लिए है। भले ही फूल मुरझा गए हों, लेकिन मिट्टी के नीचे बीज अभी भी जीवित हैं। जब बारिश आएगी, वे फिर से खिल उठेंगे। हमें उस आने वाली खुशी के बारे में सोचकर धैर्य रखना चाहिए।'
दादाजी की बात सुनकर कविन ने मन में एक उम्मीद जगाई। वह हर दिन कल्पना करता कि जब बारिश होगी, तो उसका बगीचा कितना सुंदर लगेगा। कुछ ही दिनों बाद बादल छाए और झमाझम बारिश हुई। देखते ही देखते बगीचा फिर से फूलों से महक उठा। कविन समझ गया कि जो व्यक्ति आने वाली खुशी का आनंद पहले ही मन में ले लेता है, उसे वर्तमान का दुख तोड़ नहीं पाता।