एक शांत गाँव में लियो नाम का एक लड़का रहता था। लियो बहुत प्यारा था, लेकिन जब भी वह कोई गलती करता, तो उसे छिपाने के लिए बहाने बनाने लगता था। एक दिन खेलते समय, लियो से गलती से उसकी माँ का पसंदीदा कांच का फूलदान टूट गया। डर के मारे लियो ने तुरंत कहा, 'मैंने नहीं तोड़ा माँ, बिल्ली ने गिरा दिया!'
जब उसकी माँ कमरे में आईं, तो लियो ने शांत दिखने की कोशिश की। उसने बात तो की, लेकिन उसकी आँखें इधर-उधर भाग रही थीं और उसका चेहरा पीला पड़ गया था। उसके पिता ने यह देख लिया और लियो को पास बुलाया। उन्होंने कहा, 'लियो, इस आईने में देखो।' लियो ने आईने में देखा। वह खुद को बहादुर दिखाने की कोशिश कर रहा था, लेकिन आईने में उसका चेहरा डरा हुआ और उदास दिख रहा था।
उसके पिता ने प्यार से समझाया, 'लियो, जैसे आईना सामने रखी चीज़ को वैसा ही दिखाता है, वैसे ही तुम्हारा चेहरा तुम्हारे मन की बात बताता है। तुम कह सकते हो कि तुम ठीक हो, लेकिन तुम्हारा चेहरा तुम्हारे डर और पछतावे को दिखा रहा है।' लियो को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने रोते हुए सच बता दिया। उस दिन के बाद, लियो ने हमेशा सच बोलने का फैसला किया।