एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का एक लड़का रहता था। एक दिन उसके पिता, जो एक व्यापारी थे, ने उसे मिठाइयों का एक डिब्बा देते हुए कहा, 'अर्जुन, इसे संभाल कर रखना और आज रात मेहमानों के आने तक इसे खाना मत।' इसके बाद वे काम पर चले गए।
अर्जुन बगीचे में बैठा था, तभी उसकी सहेली माया वहाँ खेलने आई। माया बहुत खुश थी, लेकिन अर्जुन के मन में एक डर था कि कहीं वह अनजाने में मिठाई न खा ले। वह माया के साथ खेल तो रहा था, लेकिन उसके चेहरे पर बार-बार घबराहट और चिंता के भाव आ रहे थे।
शाम को जब उसके पिता घर लौटे, तो अर्जुन ने बहुत शांत दिखने की कोशिश की। लेकिन जैसे ही पिता पास आए, अर्जुन की नज़रें बार-बार मिठाई के डिब्बे की ओर जा रही थीं और उसके चेहरे पर एक अजीब सी बेचैनी थी। पिता ने पूछा, 'अर्जुन, क्या तुम ठीक हो?' अर्जुन ने कहा, 'हाँ पिताजी, मैं बहुत खुश हूँ।' लेकिन पिता ने उसके चेहरे की शिकन और आँखों की घबराहट देख ली। उन्हें समझ आ गया कि अर्जुन कुछ छिपा रहा है। अर्जुन ने मिठाई तो नहीं खाई थी, पर उसके चेहरे ने सब सच बता दिया था।