एक छोटे से गाँव में कविन नाम का एक लड़का अपने समझदार दादाजी के साथ रहता था। दादाजी हमेशा कहते थे कि भोजन ही सबसे बड़ी औषधि है। एक दिन, मेज पर कविन के पसंदीदा मीठे और तले हुए पकवान रखे थे। कविन ने बिना सोचे-समझे बहुत सारा खाना खा लिया, यहाँ तक कि उसका पेट भी बहुत भारी हो गया।
खेलने जाने के बजाय, कविन को बहुत सुस्ती और थकान महसूस होने लगी। उसने उदास होकर पूछा, "दादाजी, मुझे इतनी सुस्ती क्यों लग रही है? मेरा खेलने का मन नहीं कर रहा।"
दादाजी ने प्यार से समझाया, "कविन, तुम्हारे पेट में जो खाना पहले से है, वह अभी पचा नहीं है। तुमने उससे पहले ही नया खाना भर लिया है। इससे तुम्हारा शरीर ऊर्जा पाने के बजाय भारी बोझ उठा रहा है। जब भोजन ठीक से पच जाए, तभी संयम से खाना चाहिए। यही लंबी उम्र और अच्छी सेहत का राज है।"
कविन समझ गया। उस दिन के बाद से, उसने भूख लगने पर ही और सही मात्रा में खाना शुरू कर दिया। अब वह हमेशा फुर्तीला और खुश रहने लगा।