एक छोटे से गाँव में कवि नाम का एक लड़का रहता था। कवि का परिवार बहुत गरीब था। गाँव के वार्षिक मेले के दौरान, उसके सभी दोस्त नए कपड़े पहने हुए थे और मिठाइयाँ खा रहे थे। कवि एक पेड़ के नीचे उदास बैठा था क्योंकि उसके पास कुछ भी नहीं था।
तभी गाँव के सबसे दयालु व्यक्ति, श्री राघव जी, वहाँ से गुजरे। श्री राघव जी के बारे में पूरे गाँव में मशहूर था कि वे इतने उदार हैं कि वे सपने में भी किसी की मदद करने से पीछे नहीं हटते। उन्होंने कवि को उदास देखा और उसके पास आए।
कवि ने झिझकते हुए पूछा, 'क्या मुझे एक मिठाई मिल सकती है?' उसे थोड़ा बुरा लग रहा था। लेकिन राघव जी ने मुस्कुराते हुए उसे मिठाइयों से भरा एक डिब्बा और कुछ फल दे दिए। कवि की खुशी का ठिकाना न रहा। राघव जी ने प्यार से कहा, 'बेटा, जो हमेशा देने के लिए तैयार रहते हैं, उनसे माँगना माँगना नहीं, बल्कि एक आशीर्वाद प्राप्त करना है।' कवि समझ गया कि उदार लोगों से मदद माँगना कोई शर्म की बात नहीं है, क्योंकि उनके लिए देना ही खुशी है।