एक शांत गाँव में मीरा और आर्यन रहते थे। आर्यन एक चित्रकार था। एक बार उसे अपनी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी के लिए दूर शहर जाना पड़ा। जाते समय आर्यन ने मीरा की उंगली में एक सुंदर सोने की अंगूठी पहनाई और कहा, 'मैं बहुत जल्द वापस आ जाऊँगा, तुम चिंता मत करना।'
कुछ दिन बीत गए। मीरा हर दिन आर्यन के लौटने का इंतज़ार करती। एक दोपहर, जब मीरा घर के काम कर रही थी, उसने देखा कि अंगूठी उसकी उंगली से थोड़ी ढीली होकर नीचे खिसक रही है। यह देखकर उसका दिल बैठ गया। उसने सोचा, 'अंगूठी ढीली हो रही है! क्या यह इस बात का संकेत है कि आर्यन मुझसे दूर जा रहा है? क्या वह अब कभी वापस नहीं आएगा?'
वह बहुत उदास रहने लगी। लेकिन शाम होते ही आर्यन खुशी-खुशी घर लौट आया। जब मीरा ने रोते हुए अपना डर बताया, तो आर्यन ने उसका हाथ थामकर कहा, 'प्रिय, अंगूठी का ढीला होना समय के साथ शरीर में बदलाव के कारण हो सकता है, लेकिन यह हमारे बिछड़ने का संकेत नहीं है। हमारा प्रेम इन भौतिक चीजों से कहीं अधिक गहरा है।' मीरा को समझ आ गया कि उसका डर केवल एक भ्रम था। उसने मुस्कुराते हुए आर्यन का स्वागत किया।