एक शांत गाँव में मीरा और उसका पति आर्यन रहते थे। आर्यन एक चित्रकार था। एक बार एक बड़े काम के सिलसिले में आर्यन को शहर जाना पड़ा। जब आर्यन दूर था, तो मीरा हर पल उसकी याद में डूबी रहती थी। वह खिड़की के पास बैठकर बस रास्ते को निहारती रहती कि शायद आर्यन आ जाए। उसकी आँखों ने नींद से नाता तोड़ लिया था।
कुछ समय बाद जब आर्यन वापस आया, तो एक अजीब बात हुई। वह पास होकर भी मीरा को चैन नहीं मिल रहा था। जब आर्यन उसके पास होता, तो मीरा उसे बस देखते रहना चाहती थी। वह चाहती थी कि वह उसकी हर मुस्कान और हर हरकत को अपनी आँखों में बसा ले। वह रात भर जागकर बस उसे निहारती रहती।
एक रात आर्यन ने पूछा, 'मीरा, तुम सोती क्यों नहीं हो?' मीरा ने मुस्कुराकर कहा, 'जब तुम दूर होते हो, तो मेरी आँखें तुम्हें ढूँढते हुए थक जाती हैं; और जब तुम पास होते हो, तो मेरी आँखें तुम्हें देखते रहने के लिए जागती रहती हैं।' उनके प्रेम की गहराई ने उनकी आँखों की नींद छीन ली थी।